(Music)

Announcer1: This is Meter Down podcast 'Bombay Taxi Drivers Write the City' in conversation with Kabi.

Kabi: Welcome to the 2nd episode of Meter Down podcast. Conversations with Bombay taxi drivers about migration and मुल्क, Bombay and change, taxi driving and life. TodayÕs driver is Babu. This episode runs some little longer because he tells some great taxi stories, including one about Raj Kapoor. My name is Kabi and I am an ex taxi driver.

Kabi: आपका क्या नाम है?

Babu: हमारा बाबू नाम।

Kabi: और आपका कहाँ का रहने वाला?

Babu: उत्तर परदेस। यू पी।

Kabi: कहाँ पर?

Babu: यू पी। यू पी।

Kabi: हाँ। पर कौन सा शहर?

Babu: बस्ती।

Kabi: बस्ती शहर का नाम है?

Babu: हाँ। जिला का नाम है।

Kabi: हाँ। जिला। तो आप गाँव में ही रहते कि शहर में रहते?

Babu: नहीं। गाँव में रहत।

Kabi: आपका जमीन है गाँव में?

Babu: है।

Kabi: कितना बीघा जमीन है?

Babu: हाँ जी?

Kabi: कितना बीघा?

Babu: है। चार पाँच बीघा है।

Kabi: और आपका कुँआ है?

Babu: क्या जी?

Kabi: कुँआ?

Babu: कुँआ? पानी का कुँआ?

Kabi: हाँ।

Babu: नहीं।

Kabi: अच्छा। और घर में कौन कौन है?

Babu: माँ है। बाप है। भाई है। बीवी है। बच्चे हैं।

Kabi: कितना बच्चा है?

Babu: चार बच्चे हैं।

Kabi: तो और कौन है बॉम्बे में?

Babu: बॉम्बे में हम चार भाई सब साथ में हैं।

Kabi: सब टैक्सी का लाइन में ही है?

Babu: हाँ।

Kabi: ये आपका टैक्सी है?

Babu: जी हाँ।

Kabi: कितना साल हो गया बॉम्बे में?

Babu: बॉम्बे में हो गया कम से कम बाइस पच्चीस साल।

Kabi: अच्छा। बॉम्बे कैसा लगता है?

Babu: बहुत अच्छा है?

Kabi: बॉम्बे अच्छा लगता है?

Babu: हाँ।

Kabi: क्यों?

Babu: ऐसे ही। चहल पहल है। अच्छा है। काम धन्धा।

Kabi: तो बॉम्बे आने का टाइम पे पच्चीस साल पहले, तब कितना उमर था? आप लड़का था वो जब आप।

Babu: हाँ। बच्चा था। चौदह पन्दरह साल का।

Kabi: स्कूल छोड़ के आया?

Babu: हाँ। स्कूल छोड़ के आये।

Kabi: कौन सा क्लास तक पढ़े?

Babu: छः किलास।

Kabi: छः किलास। और ये आपका टैक्सी?

Babu: हाँ जी।

Kabi: और आपका खुद अच्छा काम किया।

Babu: नहीं। थोड़ा मैकेनिक काम करता था। मैकेनिकल काम करता था। वो काम करते–करते फिर थोड़ा उसमें नहीं दिल लगा तो टैक्सी लिया कि चलो भाई, टैक्सी में गुजर–बसर होयेगा।

Kabi: तो चार ही भाई एक टैक्सी में है कि सब अलग–अलग।

Babu: नहीं–नहीं। हम खाली हमारे पास है ये टैक्सी।

Kabi: तो जब आप आया बॉम्बे में उसी टाइम पे आपका भाई था यहाँ के आप अकेला आया?

Babu: हाँ। नहीं। हमारा भाई था। सब था।

Kabi: बुलाया आपको?

Babu: हाँ। ले के आ। हमारा दादा–दादी था।

Kabi: बॉम्बे में?

Babu: हाँ। वो लोग ले के आया। उनको औलाद नहीं थी। वो लोग ले के आया हमको। दादा का इन्तकाल हो गया अभी एक महीना हो गया। हाँ। दादी है। तो हमको अलग कर के बीस से बाइस साल था अभी बाइस साल उसके साथ में तो दादा–दादी का जमता नहीं था। वो लोग सोचा कि ये साला हमारा जायदाद खा जायेगा तो हमको घर से भगा दिया। हाँ।

Kabi: तो अभी कहाँ रहता बॉम्बे में?

Babu: अभी इधर हम भाड़े पे रहता है खोली में। भाड़े की खोली में रहता है।

Kabi: और आप रात में चलाते कि दिन में?

Babu: नहीं। दिन में चलाता है। अकेला चलाता है। सुबह में निकालता है। रात को आठ नौ बजे तक चलाता है।

Kabi: सुबह कितना बजे लगा।

Babu: कोई आठ–नौ बजेü दस बजे। ऐसा कोई टाइम फ़िक्स नहीं है।

Kabi: तो रोटी कौन बनाते है?

Babu: बीबी बनाती है।

Kabi: बीबी यहीं है?

Babu: हाँ। साथ में।

Kabi: और बच्चा भी यहीं है?

Babu: हाँ। सब।

Kabi: कब लाया? बीबी बच्चा सब।

Babu: औ सुरु से ही है। जैसे सादी किया के सादी किया जभी से ले के आया। हाँ।

Kabi: ये अच्छा है। अपना बीबी बच्चा से अलग नहीं रहना।

Babu: हाँ। साथ में ही है। सादी करके साथ में ही है। गाँव में सादी किया। यहाँ बीबी ले के आया।

Kabi: तो अब वापस जायेगा गाँव पे के यहीं रहेगा?

Babu: नहीं। आता–जाते रहता है ना। आते–जाते रहता है। माँ–बाप गाँव में है ना। हाँ। नहीं तो माँ–बाप को ऐसा ठीक रहता। माँ–बाप को इधर बुला लेता है। मिल केü घूम फिर के एक–आध महीनाü चला जाता है।

Kabi: पन वापस कभी जायेगा रहने के लिये कि हमेशा अभी बॉम्बे का रहने वाला?

Babu: अभी वो तो। अभी वो किसमत बतायेगा आगे कि क्या है?

Kabi: आपके मन में क्या है?

Babu: मन में क्या है? जैसा अभी धन्धा पानी चल रहा है। नहीं चलेगा तो गाँव ही जायेगा भाग के। क्या करेगा?

Kabi: तो आपका पच्चीस साल हो गया बॉम्बे में। तो बॉम्बे में बहुत चेन्ज हो गया।

Babu: बहुत चेन्ज बोले तो बहुत चेन्ज हो गया।

Kabi: क्या–क्या चेन्ज हो गया?

Babu: सब दुकाने हैं। मार्केट। रोड, सड़क।

Kabi: तो वो जो चेन्ज हो गयाü ये अच्छा है के पहले अच्छा हैü के अभी अच्छा है।

Babu: नहीं। आज के हिसाब से अच्छा है। आज का जो जेनरेसन है वो उसके हिसाब से सही है जो भी अच्छा है। लेकिन पहले की – पहले मँहगाई नहीं थाü सस्ता था। अब लोग अपना कैसा भी कुछ भी रोजी मजदूरी कर के अपने बच्चों का पेट पाल सकते थे। आज तो ऐसा हालत हो गया है कि घर में अगर चार खाने वाले हैंü एक कमाने वाला है तो खाली वो खा–खा के ही रह जायेगा। कुछ कर नहीं सकता आगे के लिये। वो टाइम अब नहीं रह गया है।

Kabi: आपका बच्चा सकूल में है?

Babu: हाँ जी।

Kabi: प्राइवेट सकूल में के म्यूनिसिपल स्कूल?

Babu: म्यूनिसिपल।

Kabi: हिन्दी मीडियम?

Babu: हाँ जी।

Kabi: क्या–क्या उमर है बच्चा का?

Babu: एक का दस साल हैü और एक का चौदह साल हैü लड़की नहीं पढ़ता है हमारा लड़कीü छोड़ दिया अब। वो भी पन्दरहü सोलह साल की है। और लास्ट बच्चा जो है वो आठ साल का है।

Kabi: तो लड़की का सादी बॉम्बे में ही करेगा के?

Babu: हाँ। वो उसकी सगाई कर दी है। बात–चीत हो गया है लड़की का। हाँ।

Kabi: यहाँ का रहने वाला?

Babu: नहीं। अपना ही है। अपना रिलेटि में है। रिलेटि में है।

Kabi: पन यहीं बॉम्बे में रहते हैं?

Babu: हाँ। बम्बई में रहता है वो।

Kabi: तो जब आया बॉम्बे मेंü आपका क्या बिचार थाü क्या सपना थाü क्या?

Babu: नहीं। सपना ये था कि भाई कुछ काम करेगा। अच्छा पैसा कमायेगा। यही सपना था। और क्या सपना था?

Kabi: वो सपना आज भी पूरी हो गया?

Babu: नहीं। नहीं हुआ। सब अधूरा ही रह गया। कुछ नहीं। जहाँ जैसे हम पच्चीस साल चल के आये थे यानी जिस रस्ते से चला था मैंü उसी रस्ते पे घूम के वापस। उसी रस्ते ही पे हूँ बाइस साल।

Kabi: पन टैक्सी आपको खुद का टैक्सी।

Babu: हाँ जी। यही खाली जो कुछ है कि टैक्सी है। ये भी कल का कैन्सल हो गई तो वो भी कुछ भी नहीं रहेगा।

Kabi: हाँ तो आर टी ओ वाला कहता है कि नया टैक्सी आने वाला है।

Babu: हाँ। ये गवरमेण्ट क्या–क्या नहीं किया। अभी पहले पेट्रॉल पे चलता था तो पेट्रॉल निकाला। फिर डीजल बैठवाया। फिर डीजल निकाला। फिर अभी गैस बैठाया। तो जो कुछ कमाया–धमाया सब इसी में गवरमेण्ट ने ऐसा चाल चला कि ये सब उसमे ही रह गया। पेट्रॉल था। पेट्रॉल से भाई साब लोग बोले कि डीजल बैठाओ। डीजल में प्रोफिट ही होयेगा। कर्जा–वर्जा ले के डीजल बैठाया। साल भर नहीं चलने दिया। बोले गैस बैठाओ। वो कर्जा पेड नहीं कर पाया तो फिर लेयो गैस के लिये पचास–साठ हजार रुपया कर्जा लिया। फिर वो किया। अब तो कर्जा तो सब कुछ जिससे लिया है भर ही नहीं पाया और गवरमेण्ट इधर – अब अब अगर गवरमेण्ट बोल दे पन्दरह साल का गाड़ी कैन्सल करो तो कैन्सल हो गई जो बेरोजगार हो गया। रोड छाप।

Kabi: तो आपका लोन किससे लिया हुआ है? नहीं सी एन जी गैस के लिये आपने लोन लिया बैंक से कि मार्केट से?

Babu: नहीं। सी एन जी वाले से ही गैस लोन लिया। जिससे बैठायाü उससे ही लिया।

Kabi: इसके इन्ट्रेस्ट कितना होता है?

Babu: इन्ट्रेस्ट अब बोले तो दो टका।

Kabi: दो टका।

Babu: जी हाँ।

Kabi: तो ऐसे ही पच्चीस साल में अभी समय जबसे आपने टैक्सी चलाना सुरु किया आपका कभी एक्सीडेण्ट हो गया था?

Babu: हुआ। बहुत बार हुआ। ऐसा हुआ था एक बार ये गाड़ी टोटल लास हो गया था।

Kabi: कैसा हो गया था?

Babu: वो वहाँ ऐसा था कि ऐसा दो बड़ा गाड़ी टेलर आता है ना टेलरü लॉरी टेलर। एक राइट से चलता थाü एक लेफ़्ट से चलता था।

Kabi: कहाँ पर था?

Babu: वो विकरोली हाइवे पे। वो थाना मुलुन्द हाइवे है ना थाना का हाइवे। विकरोली गोदरेज के पास वाला। तो उससे रात को दो बजा हुआ था। रात को टाइम दो था। राइट वाले से साइड माँग रहा था। उसने साइड नहीं दे रहा है। वो कुछ आगे बहुत दूर तक निकल गया तो हमको क्या लगा कि ये साइड नहीं देगा। लाओ हम बीच ही बीच से निकल जाता है। बीच गेप के अन्दर से। और वहाँ एक्चुअली दोनो टेलर वाले जो हैं आपस में दोनो एक ही जगह का माल ले जा रहे थेü सलिया था। और वो लोग आपस में बात करते जा रहे थे। वो लोग को ध्यान नहीं था। तो हम सोचा कि लाओü इसी गेप में से निकल जाये। जैसे ही हमने गेप में गाड़ी डाला बोले दो सत्तरü अस्सीü नब्बे की स्पीड में गाड़ी थी। तो वो राइट वाला जो साइड – जिससे साइड माँगता थाü वो फुल लेफ़्ट में आ गया। अब हमारी गाड़ी पास नहीं हो पाई। अब वो दोनो गाड़ी के बीच के अन्दर गाड़ी ऐसे पिसने लगी। दो पैसेन्जर बैठे हुये थे।

Kabi: पैसेन्जर भी बैठे थे?

Babu: हाँ। पैसेन्जर बैठे हुये थे। दो। एक आगे बैठा थाü एक पीछे बैठा था। वो पैसेन्जर हमारा कम से कम दस साल का पुराना पैसेन्जर था। डेली हम उसको ले के आता–जाता थाü इधर ताड़देव में। उस आदमी को यहाँ से सलिया घुस के – पीछे वाले कोü यहाँ से सलिया वाकी ये वो आता है नाü वाकीü ये पैर का वाकीü ऐसा बाहर निकल गया। पाँच फुट सलिया बाहर। दोनो को घुसते हुये। हम बच गया बोले तो बच्चों के नसीब से। और कुछ नहीं।

Kabi: ये ट्रक वाला रूके के।

Babu: अब वो ट्रक वाले साले दारु–वारु पिये थे। अब क्या बोलेगा अभी हम गरीब – अब हमारा कोई नहीं सुनने वालाü मैडम। गरीब की कोई नहीं सुनता है। आपका अमीर पैसा भाव उधर चौकी में रख दिया। उसकी सब हाँ–हाँ उसका ही होयेगा। हमको कुछ मिला–जुला भी नहीं। गाड़ी पूरा टोटल लॉस हो गई थी। अगर कोई देखता था ना गाड़ी कोü तो ये बोलता था कि सब खतम हो गये हैं गाड़ी के अन्दर। कोई बचा नहीं है।

Kabi: बच गया ऊपर वाला से।

Babu: वो लोग भी बच गये। जिसको सलिया घुसा था नाü वो लोग भी बच गया।

Kabi: तो ये फिर कोई।

Babu: इतना मोटा सलिया था वो। ऐसा–ऐसा राउण्ड वाला। जो वो पिल्लर–विल्लर के अन्दर डालता है इतना मोटा सलिया।

Kabi: तो कोई ने रुके? आप लोग को हॉस्पिटल ले गया?

Babu: नहीं। कोई नहीं ले के गया। पुलिस की गाड़ी उधर से आ रही थी। हम थोड़ा 0 हमारे को नहीं लगा था इधर सर–वर में मार लगा हुआ था। हम नीचे उतरा तो देखा तो दोनों तड़प रहे थे। दोनो को उठाया। हमने वैन के अन्दर डाला। वैन के डाल के फिर वो हॉस्पिटल ले के गया। हॉस्पिटल से फिर उसको उसके घर वालों को फोन किया कि ऐसा–ऐसा हो गया। उसके घर वाले आये। उसके घर वाले ले के गये बड़े–बड़े हॉस्पिटल के अन्दर।

Kabi: ये कितना दिन पहले की बात है?

Babu: ये नाइन्टी फोर में हुआ था।

Kabi: और तब भी आपका घर पे टैक्सी था? आपका खुद का टैक्सी?

Babu: यही–यही–यही टैक्सी था। जभी – यही टैक्सी उठाओ।

Kabi: आपका – यही चाहता है कि आपका लड़का टैक्सी का लाइन में आये।

Babu: नहीं। हम नहीं ये नहीं चाहता ही नहीं है कि टैक्सी लाइन में आवे वो।

Kabi: क्यों? परेसान ज्यादा?

Babu: नहीं। इसमें आमदनी ही नहीं है। खाओ। जो भी कमाओü वो खाओ और सब लेबल सेबल हो जाता है बचता नहीं है। इसमें बरकत नहीं हैü मैडम। क्या मालूम।

Kabi: तो आपका टैक्सी दूसरे ड्राइवर रात के लिये नहीं देते?

Babu: देंगे। लेकिन वही क्या है। जितना ला के देगा नहीं उसका डबल वो निकाल लेगा तो मैं करायेगा कहाँ से उसको? काम करायेगा कहाँ? सौ–दो सौ रुपया ला के देगा और एक ही दिन काम निकालेगा हफ़्ते में वो सब जितना है सब चला जायेगा। और अपने भी टेन्सन लगा रहता हैü चिन्ता रहती है कि ड्रायवर ले के गया हैü कहीं ठोक न दिया होü कहीं कुछ ना कर दिया हो। वैसे _ न देओ तो ही अच्छा है। टेन्सन तो नहीं दिमाग में। नहीं कमायेंगे सौ – दौ सौ रुपया नहीं रहेगाü चलेगा। लेकिन दिमाग को टेन्सन नहीं है। वो रात को नींद नहीं आयेगी _। फिर बीबी बोलती है कि क्या है तुम घड़ी–घड़ी उठ के बैठता हैü उठ–उठ के बैठता है।

Kabi: चिन्ता के मारे।

Babu: बीबी को क्या बोलेगा कि काहे – क्यों मैं उठ–उठ के बैठ रहा हूँ। अब उसको सारी बातें थोड़ी बता दी जाती हैं कि भई।

Kabi: तो आप आठ–दस बजे टैक्सी निकाल देते हैं ना। आठ–नौ बजे तक घर पहुँच जाता। अभी बान्दरा जा रिया?

Babu: हाँ। ठीक है।

Kabi: फिर बान्दरा से सायन जायेगा। हो गया आपके के? अभी सात बज गया।

Babu: नहीं तो हम हींü मैडमü अभी टाइम है ना। अभी तो कितना सात – साढ़े सात बजता होयेगा।

Kabi: हाँ।

Babu: हाँ। अभी क्या है उधर से कोई मिलाü मिलाü नहीं तो ठीक है। नहीं तो फिर उससे ही उसी तरफ कर लेगाü मुँह कर लेगा जो सायन की तरफ जाने का है। मिलेगा तो ठीक है। नहीं मिला तो क्या किसमत। मिल गया तो किसमत। जो फिर इधर–उधर कहीं घुमा देगा।

Kabi: अच्छा तो ये जैसा आप हाइवे पे जायेगा या किसी बान्दरा तलाब पे जायेगा या कुछ। और कोई आयेगा नाü बोलेगाü वर्ली। तो आप ना पड़ेगा कि।

Babu: नहीं–नहीं। आयेगा। आयेगा। हमारे पास टाइम है नाü मैडम। टाइम नहीं रहेगा तो बोलेगा कि भाई हमको अब घर पे जाना है। नहीं आ सकता है। बहुत से लोग ऐसे हैं कि गाली देते हैं। कि को बोला के आतेü आया नहीं। देखोü ये टैक्सी वाले ऐसा होते हैं लेकिन आप अपना प्रोब्लम समझते हैं। हमारा प्रोब्लम हम समझते हैं। हमको कहीं जाना है। कहीं किसी को टाइम दिया है। हम भी तो दिया है किसी को टाइम। या हम अपने टाइम टेबल से घर पे जाता है। वो आदमी नहीं सोचता है। फक से गाली दे देगा। क्यों नहीं जा रहा है? चल उधर। चल ले के जा इधर से गाड़ी। बहुत से लोग ऐसे हैंü मैडम। ऐसा बोलते हैं। ये कि चलü हटाü इधर से हटाü निकाल गाड़ीü नहीं जाने का है तो। दादागिरी हर जगह दादागिरी। टैक्सी वाले से कोई भी दादागिरी करता है।

Kabi: आपका यूनियन वाला कोई दूसरी

Babu: नहीं ऐसा कुछ नहीं है जो

Kabi: बारे में जो हेल्प नहीं करते हैं?

Babu: कुछ नहीं हेल्प। हेल्प

Kabi: किसी नया टैक्सी वाला अभी ये नया टैक्सी आयेगा। ये क्या सान्ट्रो।

Babu: हाँü हाँü हाँ। ये सब आ गई हैं कितना रोड पे चल रही हैं।

Kabi: सुनी हमने कि यूनियन वालों ने ये बोले कि जब तक आप लोग हमारा ड्रायवर को नौकरी नहीं देते नया टैक्सी मेंü हम हमारा लायसेन्स आपको नहीं देगाü मतलब परमिट।

Babu: हाँ। ये जो अभी आया है जो नया टैक्सी ना। हाँ तो – क्या है वो यूनियन उसके पीछे क्या बोला है। ये इतना तुम परमिट जमा करोü तो आप तुम आगे बढ़ सकते हो। तुम गाड़ी ले सकता है। अब वो इतना परमिट वो जमा नहीं कर पाया है। लोगों को क्या है कैसे भी कर के कि चलो तुमको हम पगार देगाü ये करेगाü सब फैसिलिटी देगा। बहुत से लोग उसके ड्रायवर सीट पे हो गये हैं। लेकिन वो चलेगा नहीं। ज्यादा दिन नही चलेगा। ऐसे ही नहीं चल रहा है। लोग तेरह रुपया इसका नहीं देने को राजी हैं तो वहाँ सोलह रुपया कौन देगा?

Kabi: कोई नहीं देगा। कोई नहीं देगा।

Babu: मैडमü अभी आपकी बात नहीं बता रहा हूँü अभी समझ लो अभी मैं बान्दरा खड़ा हूँ। बान्दरा में आप आ के पूछ बोलने लगे मुझे कुलाबा जाना है। कितना लेगा टैक्सी वाला? अरे टैक्सी वाले को आपने गोवरनेण्ट ने मीटर दिया है। हाँü मैडम। सब कुछ दिया है कि भाई तुम ये कानून चलोü ये कानून चलोü ये इससे पैसा लेओ। आप अगर जब पूछेंगी कितनी पे चलेगा तो बताओ आप के सोलह रुपये की टैक्सी पकड़ सकती हैं?

Kabi: नहीं।

Babu: जब आप मुझसे तेरह रुपये में – वो भी बोल रहे हैं सौ रुपयेü पचास रुपया लेü मेरे को कोलाबा छोड़।

Kabi: तो इससे

Babu: तो वो सोलह रुपये की टैक्सी थोड़ी ही चल पायेगीü मैडम।

Kabi: कोई नहीं। लवली __ कभी नहींü आपके बिजनेस बहुत डाउन हो जायेगा।

Speaker: _ मदद कर। हे दीदी। मासूम बच्चे _

Babu: माफ करोü बाबा माफ करो। जरा अभी बाद।

Kabi: आपका कभी कोई फ़ेमस पर्सन आपका टैक्सी में आया? मतलब हीरोü हीरोइनü कोई ऐसा।

Babu: नहीं–नहीं। हमारी गाड़ी में तो अभी नहीं आया लेकिन हम दूसरे की गाड़ी चलाता था। उस वक़्त राज कपूर साहब जिन्दा थे। उनको हमने ताड़देव छोड़ा था। बस वही एक _। जभी हम नया भी था। नाइट में गाड़ी चलाता था। तो हमको ये भी नहीं पता था कि ये राज कपूर साहब हैं।

Kabi: मालूम नहीं था।

Babu: नहीं। वो जो टैक्सी बुला के ले के गया था। इतना मालूम है कि ये आर के स्टूडियो – आर के स्टूडियो किसकी है वो भी नहीं पता था हमको। तो वो जो लड़का टैक्सी लेने आया था तो वो बोला कि भाई हमको ताड़देव जाना है। बोलाü हम बोलाü चलो। वो बोले वो राज कपूर साहब के घर पे जाने का है। तो हम बोला हमको क्या मालूम राज कपूर साहब का घर कहाँ है। कौन राज कपूर साहब। तो बोले वो पहले आर के। तब मैं समझ गया कि मैं बोला ये तो आर के स्टूडियो तो है लेकिन ये किसका है हमको नहीं पता है। तो वही टाइम पे हमने खाली राज कपूर साहब को ले के गया था। उसके छः महीने के बाद लगता है कि राज कपूर साहब का इन्तेकाल भी हो गया।

Kabi: ये अगर ये नया टैक्सी निकलेगा तो आप नया टैक्सी लेने का है या लाइन छोड़ेगा?

Babu: अभी क्या है मैडम। वो तो वक़्त बतायेगा कैपिसिटी रहेगी लेने की तो लेगा। नहींü नहीं रहेगी तो क्या करेगा? छोड़ेगा। अब हर आदमी को कैपिसिटी थोड़ी है। हर आदमी यहाँ धनी नहीं है। ज्यादातर ड्रायवर ही लोग चलाते है गाड़ी।

Kabi: और आप टैक्सी की लाइन में नहीं हो तो आप मैकेनिक का लाइन में ही वापस जायेगा?

Babu: हाँ। चला जायेगा। उसमें क्या है। जब नहीं देगा या तो मैकेनिकल लाइन में जायेगा फिर। नहीं तो कुछ धन्धा पानी करेगा। करेगा। हाँ। तो बच्चों का पेट पालने के लिये कुछ न करना ही पड़ेगा।

Kabi: कुछ करना पड़ेगा।

Babu: या किसी की दूसरे की प्रायवेट वगैरह को ही चलायेंगे। दो पाँच हजार रुपया अगर मिल गया। कम से कम घर का खर्चा तो निकलेगा।

Kabi: आप दिन में कितना कमाते? _। मतलब _ के बाद।

Babu: अभी ऐसा है मैडम। धन्धे के ऊपर है अभी।

Kabi: हाँ। नहींü एवरेजü एवरेज। कम से कम।

Babu: हाँ। नहीं तो कम से कम दो–पाँच सौ रुपये का तो जरूर। पाँच सौ रुपया बनाने की कोसिस करता है। और मैडमü ऐसे अभी हम अपनी बात बता रहे हैं के हमको अगर दो–चार–पाँच सौ रुपये का धन्धा हो जाता है नाü तो हमारे हाथ–पैर में दरद होने लगते हैं। फिर आगे बनाने की हिम्मत नहीं होती हैü चलाने की। कि और भी बना ले। ऐसा है। और कभी–कभी नहीं भी बनता है तो ऐसा नहीं है कि नहीं बनता है तो आप रात _ चलाऊँगा मैं गाड़ी।

Kabi: नहीं?

Babu: दिन में नहीं – नहीं बना तो नहीं बना तो चले गये। जो मिला नसीब काü जो ना मिला वो भी नसीब का।

Kabi: कोई ड्रायवर ने मेरे को ये बताया कि टैक्सी वाला उसे रिक्शा को चूहा बोलते। बोलते हैं आप लोग चूहा?

Babu: नहीं। नहींü ऐसा बोलते नहीं है। चूहा नहीं बोलते हैं। अभी क्या है। जैसा आदमीü वैसी जुबान वापरे तो बात अलग है। अगर हम अच्छे हैं तो हम क्यों किसी कोü भाईü खराब बोलेंगे? हैं?

Kabi: पन दुख देती है रिक्शा वाला। रिक्शा वाला। बहुत इधर–उधरü इधर–उधर।

Babu: हाँ। वो अब क्या कर सकते हैंü मैडम? वो भी तो – उनको भी पास किया गया हैü रोड पे चलने के लिये। कोई ये तो है कि नहींü चलो जबरदस्ती हैं। गोवरमेण्ट ने उनको भी तो रोड पे ही ले के आया है। अब हम उनको भला–बुरा बोल के भी कुछ हमको हासिल नहीं होयेगा ना। ऐसा लगता है क्यों हम बुरा बोलेंü भाई? वो अच्छा ही है। अब बोलने वाले तो कुछ भी बोलते हैंü मैडम। कोई उसको खरगोश बोलता हैü कोई चूहा बोलता हैü कोई खटमल बोलता है।

Kabi: खटमल।

Babu: हाँü अब क्या है।

Kabi: और कुछ बोलना चाहते हैं?

Babu: और क्या बोलें?

Kabi: दुनिया को।

Babu: और क्या बोलेंü मैडम? जो आप पूछेü वो बताया।

Kabi: और कोई विचार है? बॉम्बे का ज़िन्दगी का।

Babu: ज़िन्दगी क्या हैü अभी _ क्या ख्वाहिश? कुछ भी ख्वाहिश नहीं है। मैडमü अब तो ख्वाहिश रही नहीं गई। अब तो यह देखना है कि कितनाü कैसा भी ज़िन्दगी अब निकले और भी। ख्वाहिश तब होती हैü आदमी जब बीस–पच्चीस की उमर में रहता हैü तो उसकी हर ख़्वाहिस। अब आदमी चालीस के रास्ते पे हैü चालीस के लगभग हो गया तो क्या _?

Kabi: आप चालीस साल का उमर आप?

Babu: हाँ। चालीस के लगभग हो गया है।

Kabi: लगभग।

Babu: हाँ। एक–आध साल होयेगा आजू–बाजू। साल–दो साल कोई फरक नहीं।

Kabi: अब ख्वाहिश गया सब आप?

Babu: क्या है? नहीं। कुछ भी ख्वाहिश नहीं। क्या है? ख्वाहिश यही है किü भाईü बस कमावेंü कुछ पैसा जमा करें। वो तो हो ही नहीं रहा है। तो इससे अच्छाü रखने का ही नहीं कोई ख्वाहिश। इतने दिन से कमा के कुछ नहीं हो पाया। तो अब क्या करेगा। जो कुछ है।

Kabi: I hope you enjoyed. The show notes are at MeterDown.WordPress.com but I do not have any photos of Babu to post because I so enjoyed his conversation, I forgot to take one. I will post some outtakes, some photos of taxis and you can leave suggestions, thoughts, comments, critiques. And join me for the next episode of MeterDown where we write the city in conversation with a Bombay taxi driver. Till next time.