(Music)

Announcer1: This is Meter Down podcast 'Bombay Taxi Drivers Write the City' in conversation with Kabi.

Kabi: Welcome to the 4th episode of Meter Down podcast. Today, we hear Sevalal Jaiswal. He lives in Lower Parel and he describes the changes their and they have affected his life. He talks about back seat kissing, discloses smething personal and tells us his story. My name is Kabi and I am an ex taxi driver.

Kabi: आपका क्या नाम है?

Sevalal Jaiswal: सेवालाल जयसवाल.

Kabi: और आप कहाँ के रहने वाला?

Sevalal Jaiswal: मैं यू पी का रहने वाला हूँ।

Kabi: कौन सा शहर यू पी में?

Sevalal Jaiswal: यू पी पहले बनारस जिला था। अभी छोटा सा जिला बना है भदोई जिला। कालीन का काम वहाँ होता है।

Kabi: क्या होता है?

Sevalal Jaiswal: कालीन का काम। कालीन जो आप फ़र्स पे बिछाते हैं उसका काम वहाँ होता है। भदोई कालीन के काम में काफ़ी मसहूर है पूरे देस विस्व में।

Kabi: आप क्या करते थे आप बॉम्बे आने का पहले?

Sevalal Jaiswal: बॉम्बे आने के पहले मैं कालीन का ही काम करता था।

Kabi: अच्छा। इसको छोड़ के यहाँ क्यों आये आप?

Sevalal Jaiswal: जी कुछ प्रॉब्लम हो गया कालीन के काम में। इतना महँगाई बढ़ गया और वहाँ के जो काम कराने वाले थे वो अपना पैसा नहीं बढ़ाये। इसकी वजह से वहाँ से आना पड़ा।

Kabi: कितना दिन हो गया बॉम्बे में?

Sevalal Jaiswal: '84 से मैं यहाँ हूँ।

Kabi: अच्छा। काफ़ी दिन हो गया।

Sevalal Jaiswal: हाँ। काफ़ी दिन हो गया।

Kabi: जब आप आया आप अकेला आया?

Sevalal Jaiswal: जी मैं अकेला आया।

Kabi: कोई जान पहचान था यहाँ?

Sevalal Jaiswal: हाँ जान पहचान था। मेरे घरवाले थे। मेरे पिताजी भी थे। मेरे मामा थे।

Kabi: अच्छा। पूरी परिवार ले के आया?

Sevalal Jaiswal: हाँ पूरा ही परिवार। मैं सादी भी यहीं किया हूँ महारास्ट्र में।

Kabi: अच्छा।

Sevalal Jaiswal: यहीं सिफ़्ट हो गया।

Kabi: पूरा सिफ़्ट हो गया?

Sevalal Jaiswal: जी।

Kabi: अच्छा। पर जब आप आया आप अकेला आया?

Sevalal Jaiswal: जी मैं अकेला आया लेकिन यहाँ सादी किया फिर दो हो गये। इसके बाद बच्चे हुये तो और भी हो गये।

Kabi: अच्छा। यहाँ बॉम्बे में सादी किये ये यू पी वाली से कि?

Sevalal Jaiswal: नहीं नहीं महारस्ट्रियन से।

Kabi: और ये कैसे हो गया ये?

Sevalal Jaiswal: ऐसा ही। एक साथ रहते रहते हो गया। पहले मैं नौकरी करता था। टैक्सी लाइन नहीं था।

Kabi: अच्छा कौन सा नौकरी करता था?

Sevalal Jaiswal: मैं एक लॉण्ड्री में था। कपड़ा धोने का सैम्पलिंग उसमे सिर्फ़ छोटा छोटा टुकड़ा आता था धोने सैम्पल पास कराने का।

Kabi: हाँ।

Sevalal Jaiswal: वहीं सैम्पल पास कराता था।

Kabi: हाँ।

Sevalal Jaiswal: इसके बाद वहीं साथ में काम करते थे और सादी हो गया।

Kabi: अच्छा। और इसकी माँ बाप मंजूर था?

Sevalal Jaiswal: हाँ। माँ बाप मंजूर था?

Kabi: ये अच्छी बात है। तो फिर ये वॉशिंग का लाइन क्यों छोड़ के टैक्सी में क्यों आया?

Sevalal Jaiswal: वॉशिंग का लाइन छोड़ा नहीं बल्कि छोटे वर्करों ने यूनियन कर दिये और कंपनी बंद कर दिया सेठ ने। फिर मैं।

Kabi: यूनियन के पीछे?

Sevalal Jaiswal: हाँ यूनियन के पीछे। फिर मजबूरन ये लाइन अपनाना पड़ा।

Kabi: तो टैक्सी का लाइन क्यों चूज़ किया?

Sevalal Jaiswal: पहले से ही लायसेन्स बनाया था मैंने और पहले से भी ड्रायविंग का मेरा सौक था। ड्रायविंग का सौक था। मैं पहले भी ड्रायविंग करता था। इसकी वजह से टैक्सी लाइन में आया।

Kabi: अच्छा। तो आपके टैक्सी के पीछे ये सिटी यूनियन का छपा है। तो आप सिटी यूनियन में हो कि -- ये किसका टैक्सी है?

Sevalal Jaiswal: नहीं ये तो टैक्सी मेरा ही है।

Kabi: तो आपने सिटी यूनियन में क्यों आया?

Sevalal Jaiswal: इसमें आने का मतलब था मेरा क्या इसका जो संस्थापक है कुरेसी थोड़ा काम कर के दिया हमारे इधर टैक्सी स्टैण्ड लगाया और कुछ विवाद हुआ था टैक्सी ड्रायवर और हवलदार से। उसमें उसने सहयोग दिया काफी लोगों को, टैक्सी वालों को तो इसकी वजह से उसका स्टीकर लगा है और उसके संस्था में ज्वाइण्ड हो गये।

Kabi: कब से टैक्सी चलाया? आप '84 में आया।

Sevalal Jaiswal: '84 में आया मैं '95 से टैक्सी चला रहा हूँ।

Kabi: और अभी __ क्या बारह साल में आपने खुद का टैक्सी लाया?

Sevalal Jaiswal: हाँ बारह साल में खुद का टैक्सी लाया।

Kabi: तो आप अकेला आया। इधर आपका सादी हो गया। फिर आपने आपका माता पिता को बुलाया।

Sevalal Jaiswal: जी।

Kabi: आपका जमीन नहीं है वहाँ?

Sevalal Jaiswal: नहीं। है। जमीन है मैडम।

Kabi: तो कितना जमीन है आपका?

Sevalal Jaiswal: जमीन करीब 2 एकड़ जमीन है मेरा।

Kabi: अच्छा। एक बात समझा रहा हूँ आपको। हम 2 एकड़ नहीं समझता। हम तो बीघा समझता है।

Sevalal Jaiswal: बीघा। हाँ वही बीघा।

Kabi: बीघा और एकड़ एक ही बात है? __ सुनी हमने कि

Sevalal Jaiswal: एकड़।

Kabi: एक एकड़ में दो बीघा।

Sevalal Jaiswal: हाँ। एक एकड़ में दो बीघा होत।

Kabi: तो आपके चार बीघा।

Sevalal Jaiswal: जी।

Kabi: और ये जमीन को उपर कुआँ है?

Sevalal Jaiswal: जी हाँ। कुआँ है।

Kabi: और ये कुआँ में पानी है?

Sevalal Jaiswal: हाँ पानी है। मसीन है। हम सिंचाई करते हैं हैण्ड पम्प। वो कुए में लगा है।

Kabi: तो कौन है गाँव में अभी?

Sevalal Jaiswal: वहाँ पे अभी बीबी है, माँ है।

Kabi: अच्छा वाँ है। यहाँ नहीं है।

Sevalal Jaiswal: नहीं। बीबी यहाँ थी। अभी वहाँ है। पहले तो यहाँ साथ में ही रहती थी। अभी बच्चे हो गये फिर बच्चों को सँभालना है। घर की खेती भी सँभालना है। माँ थोड़ा अभ एजेड हो गई है। तो वो काम नहीं कर सकती है। तो इसके लिये बीबी भी वहाँ रहती है। यहाँ रहती है। ऐसा रहने का वो नहीं है कि यही रहे या वहाँ रहे। साल में छः महीना यहाँ रहती है। तो छः चार महीना वहाँ रहती है। ऐसा आती जाती रहती है।

Kabi: कितना बच्चा?

Sevalal Jaiswal: मैडम बच्चे तीन हैं।

Kabi: और सब स्कूल में हैं?

Sevalal Jaiswal: हाँ। सब स्कूल में हैं। दो बच्चे यहीं पढ़ रहे हैं। हमारे साथ में ही हैं दो बच्चे हैं। और एक छोटी है गाँव में है माँ के साथ में।

Kabi: तो आप अकेला रहते हैं?

Sevalal Jaiswal: जी नहीं। मैं और दो बच्चे हैं। और सगे वाले हैं दो।

Kabi: कहाँ रहता आप?

Sevalal Jaiswal: बस यहीं बाजू में। बॉम्बे डाइंग मिल है उसके बाजू में। अभी बंद हो गया है। अभी बॉम्बे डाइंग में ही हैड्रो कैफे बहुत मसहूर है। काफी लोग आते हैं। उसके ठीक सामने ही मेरा रूम है। बॉम्बे डाइंग का जो गेट है हैड्रो कैफे का उसके सामने ही जैन मंदिर है। उसके अंदर दो बिल्डिंग छोड़ के मैं रहता हूँ।

Kabi: तो क्या बिचार है ये पहले ये जो मिल था? आप तो जब आया मिल बंद था होगा। कि चालू था?

Sevalal Jaiswal: कौन सा?

Kabi: बॉम्बे डाइंग।

Sevalal Jaiswal: बॉम्बे डाइंग चालू था। चालू था।

Kabi: चालू था। तो आप के सामने ये मिल बंद हो गया।

Sevalal Jaiswal: जी। हमारे सामने ये बंद हुआ।

Kabi: बंद हो गया। बंद। मिल था। मतलब बिल्डिंग। और अभी ये हाड्रा कैफे आया। ये कम्पाउण्ड ये बड़ा बड़ा कम्पाउण्ड आया। तो आपको क्या लगता है? आप के जहाँ आप रहता है ये बिल्कुल चेन्ज हो गया पहले से।

Sevalal Jaiswal: हाँ पहले से तो बहुत चेन्ज हो गया। पहले से रहन सहन भी काफी चेन्ज हो गया है। पहले हम लोग चाल में थे। वहाँ पे चाल था एक। उसका नाम था दारूवाला पतरा का चाल। लेकिन अभी वो बिल्डिंग बन गया है। उसका सत्यके नगर नाम रख दिया गया है। तो चेन्ज बहुत बहुत चेन्ज हो गया है।

Kabi: तो ये चेन्ज आपके लिये अच्छा है?

Sevalal Jaiswal: कोई चेन्ज अच्छा है तो कोई चेन्ज खराब है ये चेन्जेस कुछ लोगों के लिये अच्छा है तो कुछ लोगों के लिये खराब है।

Kabi: आपके लिये कैसा है?

Sevalal Jaiswal: नहीं। मेरे लिये तो ठीक है फिलहाल।

Kabi: क्यों ठीक है?

Sevalal Jaiswal: मेरे लिये इसीलिये ठीक है। देखो। मेरा लाइन टैक्सी लाइन है और जब ये आफिस बन गया तो आफिस से भाड़ा निकलेंगे। उससे हम कमायेंगे भी। आफिस बन गया है तो। और पहले चाल था। अभी बिल्डिंग बन गया है। चाल में गंदगी बहुत होता है। बीमारी फैलता था। अभी बिल्डिंग में साफ सफाई है। बीमारी होने का चान्सेस बहुत कम रहता है। तो इसीमें फायदा भी है। और फायदा है हमारे लिये।

Kabi: जो चाल पहले आप चाल में रहते थे?

Sevalal Jaiswal: जी। पहले चाल में था।

Kabi: और ये ही लोग ने इसको तोड़ फोड़ कर के और आपको बिल्डिंग दिया।

Sevalal Jaiswal: हाँ। बिल्डिंग दिया।

Kabi: आपको कुछ पैसे देना पड़ता था कि फ़्री में दिया।

Sevalal Jaiswal: नहीं। वो फ़्री में दिया।

Kabi: अच्छा। ये कब की बात है?

Sevalal Jaiswal: ये '91 की बात है। '90-'91 की बात है। जब ये बिल्डिंग दिया तोड़ के।

Kabi: तो आपका ससुराल मिल वर्कर था कि पहले मिल में काम करता था आपके?

Sevalal Jaiswal: कौन?

Kabi: सुसराल।

Sevalal Jaiswal: नहीं। ससुरा मिल में काम नहीं था।

Kabi: नहीं था?

Sevalal Jaiswal: नहीं।

Kabi: वो

Sevalal Jaiswal: ऐसा लोकल कंपनी में काम थे। _ थे।

Kabi: आपका दोनो ही बच्चा कौन सा स्कूल में जाते हैं?

Sevalal Jaiswal: अभी ये साधारण स्कूल में पढ़ा रहे हैं। ऐसा मैडम टैक्सी ड्रायवर का इतना कमाई नहीं रहता कि इंग्लिस मीडियम में पढ़ा सके। बहुत कम लोग ऐसे हैं जो कि इंग्लिस मीडियम में पढ़ाते हैं।

Kabi: हाँ। तो आपका पास है एक म्यूनिसिपल स्कूल ग्लोब मिल पैसेज।

Sevalal Jaiswal: जी। उसी में। उसी में है ग्लोब मिल पैसेज में ही है।

Kabi: मैं जानती थी ग्लोब मिल पैसेज जा चुका रहा है आप।

Sevalal Jaiswal: जी। ग्लोब मिल पैसेज में ही है।

Kabi: तो प्रायमरी में है कि सेकेण्डरी में?

Sevalal Jaiswal: प्रायमरी में है अभी छोटा लड़का।

Kabi: जैसा आप यू पी का हो। पन हम बॉम्बे का हो कि यू पी का हो कि आपका मुलक जनम की बात नहीं है। दिल की बात है।

Sevalal Jaiswal: नहीं। दिल की बात तो -- देखो मैडम। अभी दिल की बात कहें तो इस समय तो हम बॉम्बे के ही हैं। बॉम्बे के अच्छे और बुरे के बारे में सोचते हैं। बॉम्बे का अच्छा हो। बिकास हो। फिलहाल यहाँ रह रहे हैं तो यहाँ के बारे में ही सोचते हैं। तो बॉ्मबे के ही हैं। और अपना जनमभूमि यू पी है। इसके लिये वहाँ के बारे में भी सोचना हमारा फर्ज है। और फिर हिन्दुस्तान के हैं तो हिन्दुस्तान के भलाई के बारे में सोचना मेरा धर्म है। क्या मैडम?

Kabi: कौन सा क्लास तक पढ़े आपने?

Sevalal Jaiswal: मैडम। सही बोलें?

Kabi: सच्ची बोलो।

Sevalal Jaiswal: सही बोलें तो हम कोई क्लास नहीं। मैं एक अनपढ़ आदमी हूँ।

Kabi: बिल्कुल अनपढ़?

Sevalal Jaiswal: बिल्कुल।

Kabi: अँगूठा छाप?

Sevalal Jaiswal: जी। अँगूठा छाप। मैं अँगूठा छाप हूँ लेकिन ये सच बहुत कम बोलता हूँ क्योंकि अपना -- क्या है, ये कहना कि मैं अँगूठा छाप हूँ, अपना बेइज्जती महसूस होता है, नहीं? लो स्तर महसूस होता है इसलिये मैं ये नहीं बताता हूँ कि जैसे मैं अँगूठा छाप हूँ। लेकिन आपने सही बोलने के लिये बोला इसके लिये मैं बोल दिया।

Kabi: आपने बहुत अच्छा किया। आप एक अँगूठा छाप आदमी हो तो आप आपके दस छोड़ के अकेला आया ना और आपके मालिक हो टैक्सी। आपको बहुत मानता हूँ। आपने नहीं कहा हम अनपढ़ हैं। हम ये हैं। हम कुछ नहीं कर सकता। आपने ऐसा नहीं किया।

Sevalal Jaiswal: नहीं। मैडम मेरा एक स्वभाव रहा है। कभी भी निरासा अपने आसपास नहीं भटकने दिया। मैं हमेसा पॉजिटिव सोचता हूँ। कभी निगेटिव सोचा नहीं। अभी आपसे बातें हो रही हैं तो ये भी बता दूँ कि मेरे पिताजी भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र में काम करते थे यहाँ बॉम्बे। बॉम्बे भाभा परमाणु अनुसंधान जो बी आर एच ए है वासीनाका चेम्बूर। वहाँ पे काम करते थे। अच्छी सर्विस थी। लेकिन उन्होंने मेरे पैदा होने के बाद मेरी माँ को छोड़ दिया और मैं एक हिसाब से अनाथ ही पला बढ़ा हूँ इसके लिये हमारी सिक्छा पढ़ाई नहीं हो पाई। माँ अपने मायके में थी और वो मायके में ही आज तक है।

Kabi: क्यों? आपके बहन भाई है?

Sevalal Jaiswal: नहीं। बहन भाई कोई नहीं है। मैं अकेला था।

Kabi: आप और आपकी माता जी।

Sevalal Jaiswal: जी

Kabi: तो आपकी बीबी यू पी के बारे में क्या बोलती है?

Sevalal Jaiswal: यू पी के बारे में वही जो मैं यहाँ के बारे में बोलता हूँ वही वो यू पी के बारे में बोलती है। क्योंकि मैं यहाँ का हो के रह गया तो वह यू पी की हो के रह गई।

Kabi: हाँ। ये बहुत अच्छी बात है कि आपने यहाँ बॉम्बे में सादी किया। भाग के आपका च्वायस से किया।

Sevalal Jaiswal: जी। सादी के बारे में भी देखते हैं तो फिर ऐसा कई लोगों को मैं देखा हूँ कि जो लव मैरिज किये हैं उनका सक्सेज नहीं हुआ है। बहुत कम लोगों का सक्सेज हुआ है। जिसमें हमारा एक लव मैरिज सक्सेज हुआ और हम दोनों एक दूसरे से बहुत अच्छे माने काम्बिनेसन है। दोनों बहुत अच्छे से रहते हैं। एक दूसरे को एक दूसरे का भावना समझते हैं क्या कैसा रहना चहिये, कैसा एक दूसरे के साथ बरताव करना चहिये। आज भी वह गाँव है और मैं यहाँ हूँ लेकिन ऐसा कभी कोई दिन नहीं आता जब भी मैं फोन कर के उससे बात न कर लूँ।

Kabi: अच्छा। अभी कर सकते हैं ऐसे। फोन करने का।

Sevalal Jaiswal: हाँ। अभी कर सकते हैं।

Kabi: पहले नहीं कर सकते थे।

Sevalal Jaiswal: पहले नहीं

Kabi: हाँ पहले नहीं। __

Sevalal Jaiswal: पहले नहीं। पहले तो लेटर का था और फिर कोई जाने लगे तो उसे संदेस भेजो। पहले नहीं था। लेकिन पहले भी अपने यहाँ थोड़ा क्या सिटी से थोड़े से हट के हैं तो हफ्ते में एक दिन सिटी में जाना पड़ता है जैसे खाने पीने का सामान खरदना है तो वहाँ पे फोन रहता तो हफ्ता में एक दिन मेरा फिक्स था वहाँ फोन करने का और उस समय बीबी वहाँ आ जाती थी। जब ये वहाँ रहती तो। नहीं तो वो मेरे पास ही रहती है अक्सर।

Kabi: वो आपके पास सेल फोन है?

Sevalal Jaiswal: जी हाँ है।

Kabi: और उसके पास भी सेल फोन है?

Sevalal Jaiswal: उसके भी उसके पास भी सेल फोन है।

Kabi: पेपर में आया एक दिन कि जो टैक्सी ड्रायवर कोई कोई टैक्सी ड्रायवर जैसे कोई लोग लुगाई लड़का लड़की तो इसका जगह नहीं है जाने का प्रायवेसी होना तो वो टैक्सी में प्रेम करता। किसिंग करता है। ये तो कभी हो गया था आपका?

Sevalal Jaiswal: जी ऐसा तो होता रहता है लेकिन सिर्फ किसिंग तक ही सीमित रहता है। बाकी नहीं

Kabi: हाँ। किसिंग तक।

Sevalal Jaiswal: क्योंकि यह अपना धंधा है। हम इसमें और भले गलत काम नहीं करने देंगे। ऐसा मेरे साथ भी होता है कभी कभी। कभी कभी क्या, दिन में भी ऐसे मिलते हैं जो कि बोलते हैं प्लीज आप टैक्सी छोड़ के थोड़ा दूर चले जाइये। पैसा आपका -- जो भी पैसा है मैं दूँगा। सौ रूपये ज्यादा दिलाय लेना ये। लेकिन नहीं ऐसा नहीं ये पैसे के लिये अपना रोजी रोटी जो है उसको इतना गलत करना तो ये सब नहीं करते। हाँ जहाँ तक किसिंग का सवाल है तो ये तो आम लोग ऐसा चलते फिरते भी करते हैं तो फिर गाड़ी में किसिंग करना कोई वो नहीं समझते हैं।

Kabi: कोई ने ऐसे आपका टैक्सी से भाग कर पैसे नहीं दिया?

Sevalal Jaiswal: तो भी कोई प्राब्लम नहीं है मैडम। क्योंकि ऐसे भी बहुत से लोग आते हैं जो कि पैसा नहीं देना चाहते तो उनके साथ फिलहाल अब आपसे सही बोलना पड़ेगा जो अपना परिस्थिति देखते हैं जैसे जो पैसेन्जर से हम भारी हैं जिस पैसेन्जर पे भारी हैं उससे मारा मारी भी कर लेते हैं और उसका पैसा निकालने का कोसिस करते हैं कि जो अपना भाड़ा है वो निकाल लूँ या पुलिस स्टेसन ले के जाऊँ, पुलिस वालों से पैसा निकलवाऊँ। और जब देखते हैं कि पैसेन्जर मेरे पे भारी है तो सोचते हैं जाने दो मार खाने से अच्छा है पैसा छोड़ दो। इसमें क्या है दोनो अपनाना पड़ता है। तो ये मार खाने से अच्छा, पैसा छोड़ दो। और जब ये देखते हैं कि पैसेन्जर थोड़ा लूज है या ऐसा तो फिर पैसा वसूल लेते हैं। और अपने साथ तो फिलहाल ऐसा नहीं हुआ है आज तक कि कोई पैसेन्जर पैसा नहीं दिया हो। क्या है मैं टीवी पे देखता रहता हूँ कि कितने लोगों के साथ गलत होता है, क्या करते हैं। पाँच सौ का नोट बोलते हैं चेन्ज दे दो और ले के चले जाते हैं। तो इससे मैं काफी सावधान रहता हूँ। एक घटना जो है कि मेरे साथ हुआ था। वर्ली से ही एक पैसेन्जर बैठा था मेरे गाड़ी पे और आया बान्दरा। वो थोड़ा पिया था। बान्दरा आया। तालाब पे वो पैसा नहीं दे रहा था। बोला नहीं दूँ। मेरे पास है ही नहीं है। वो थोड़ा पिया था और कमजोर भी था तो मैं उसका घड़ी छीन लिया। बोला ये ले। घड़ी ले लेता हूँ और जभी पैसा तुम्हारे पास हो तो बॉम्बे डाइंग के इधर आना और ले के जाना। घड़ी उसका काफी दिन तक रखा था। न तो आया, पैसा दिया और ना ही घड़ी ले के गया।

Kabi: तो फिर आप घड़ी नहीं बाँधे।

Sevalal Jaiswal: नहीं घड़ी मैं नहीं बाँधता। एक दिन एक बजे रात चार लोग मेरे गाड़ी पे बैठे और दादर पाँच नम्बर प्लेटफाम के इधर ले के गये और वहाँ चाकू लगा के मेरा घड़ी और पैसा भी सब छीन लिये। इसके बाद से मैं घड़ी लगाना छोड़ दिया। कभी घड़ी लगाया ही नहीं।

Kabi: तो आपका क्या ख्वाहिश है?

Sevalal Jaiswal: इस ख्वाहिस तो मैडम हर आदमी का बहुत बड़ा ख्वाहिस होता है लेकिन पूरा कभी नहीं होता है। कुछ ख्वाहिसें पूरी होती हैं कुछ नहीं होती हैं। तो मैं अपना ख्वाहिस क्या बोलूँ आपको।

Kabi: वो जो है जो बोलो।

Sevalal Jaiswal: जो मेरा पहला ख्वाहिस तो था कि मैं बच्चों को अच्छी परवरिस कर सकूँ। अच्छे स्कूल में डाल सकूँ और अच्छी तरह से उन्हें खिला पहना सकूँ जो कि हमें नहीं मिला है वो अपने बच्चों को दे सकूँ जो कि नहीं हो पाया। अब यही हर आदमी सायद अपने बारे में बहुत कम चाहता है और अपने बच्चों के बारे में अधिक सोचता है जो आने वाली नस्लें हैं उनके बारे में अधिक सोचता है कि हमारे बच्चे, हमारे लड़का या लड़की कोई भी अच्छी तरह से रहें। हमारे पास ज्यादा पैसा हो और ज्यादा बिकास करें। यही सब चाहते हैं। यही हर आदमी का ख्वाहिस होता है। वही अपना भी है। कोई अलग ख्वाहिस नहीं है मैडम।

Kabi: I hope you enjoyed this episode. Please visit the MeterDown blog at MeterDown.WordPress.com. Starting with this episode, there is a page in English and a page in Hindi. Also, there is a transcript of the podcast in Hindi. All Hindi translations and transcriptions are by V. S. Rawat from Indore. In fact, the ideas for having the transcript and other suggestions for low bandwidth situations came from him and I owe him big thanks. I hope you join me for the next episode when we write the city in conversation with another Bombay taxi driver. Til next time.