(Music)
Announcer1: This is Meter Down podcast
'Bombay Taxi Drivers Write the City' in conversation with Kabi.
Kabi: Welcome to the 5th
episode of Meter Down podcast. Today, we hear Subhash Chand from Chandamau, UP
who has made it from the footpath of Grant Road to taxi owner and now wants to
go to Saudi. My name is Kabi and I am an ex taxi driver.
Kabi: तो आपका
क्या नाम है?
Subhash Chand: मेरा
नाम सुभाष
चंद।
Kabi: और आप
कहाँ का रहने
वाला?
Subhash Chand: हम यू पीü लखनऊ।
Kabi: लखनऊ। और
आपके कितना
टाइम हो गया
बॉम्बे में?
Subhash Chand: हमको?
हमको हो गया
बारह बरस हो
गया है इधर।
Kabi: और
बारह बरस से
आप टैक्सी
चलाय रिया?
Subhash Chand: नहीं। मैं
नौ बरस से
टैक्सी चला
रहा हूँ।
Kabi: इसके
पहले क्या
करता था?
Subhash Chand: इसके पहले
मैं सेठ के
यहाँ नौकरी कर
रहा था।
Kabi:
अच्छा। तो ये
नौकरी क्यों
छोड़ दिया?
Subhash Chand: वो सेठ की
कंपनी टूट गई।
सेठ यहाँ से
चला गया। वो
अपना मर गया
ना सेठ। उसके
बच्चे नहीं
थे। इसलिये वो
छोड़ के फिर
टैक्सी लाइन
में आना पड़ा।
Kabi: और
कोई दूसरा
लाइन का सोचा
नहीं है?
Subhash Chand: नहीं मैं
वो सेठ के
यहाँ साथ साथ
फिर गाड़ी चला रहा
था सेठ की।
इसलिये हमको
गाड़ी ही का
सुविधा अच्छा
लगा। दूसरा
सुविधा था
नहीं कोई।
Kabi: तो आप
खास लखनऊ में
ही रहते थे कि
लखनऊ जिला का अंदर?
Subhash Chand: नहीं।
लखनऊ जिला के
अंदर।
Kabi: तो आपका
कौन सा गाँव
था?
Subhash Chand: मेरा
गाँव? चंदामऊ।
Kabi: ये
गाँव है कि
छोटी शहर है?
Subhash Chand: ये गाँव
है। दिहात है
एकदम। एकदम
जिसके पास ही
में है लखनऊ
के।
Kabi: तो
आपके जमीन है
गाँव में?
Subhash Chand: गाँव में
जमीन नहीं है
मेरे पास।
Kabi:
अच्छा इसलिये
आया?
Subhash Chand: इसीलिये
इधर आया।
Kabi: पर
बॉम्बे में
क्यों आया?
डेल्ही में
क्यों नहीं
गया? कोलकता
के?
Subhash Chand: बॉम्बे
में थोड़ा पैसा
ज़्यादा मिलता
है और उधर
पैसा कम मिलता
है इसलिये
बॉम्बे में हम
लोग आये इधर।
Kabi: आपका
कोई जान पहचान
था यहाँ बॉम्बे
में?
Subhash Chand: नहीं मेरा
वैसा जान
पहचान नहीं
था। मैं पहली सफर
जब आया इधर तो
मेरे साथ वाला
था वो मेरे को छोड़
के गया इधर
से। इस मैं
फुटपाल पे था।
एक उस सेठ ने
मेरे को उससे
बात किया तो
वो सेठ बताया कि
हमारे यहाँ
नौकरी खाली है
आप नौकरी कर
लो। मैं उसके
यहाँ नौकरी
किया।
Kabi: आप
फुटपाथ में
था। कहाँ पर?
Subhash Chand: ग्राण्ट
रोड पे।
Kabi: ओ हो
तो जब आप आया
वहाँ से। क्या
ले के आया?
Subhash Chand: कुछ नहीं।
खाली हाथ आया
वहाँ से।
Kabi:
सूटकेस भी
नहीं था कोई?
Subhash Chand: कुछ भी
नहीं था। एक
थैला थी।
Kabi: गाँव
में कौन है
अभी?
Subhash Chand: गाँव में
पिता जी हैं।
मम्मी हैं।
Kabi: बहन
भाई है?
Subhash Chand: बहन भाई
कोई नहीं है।
Kabi: आप
अकेला हो?
Subhash Chand: अकेला
हूँ।
Kabi: शादी
शुदा?
Subhash Chand: अभी कुछ
नहीं।
Kabi: तो
आपका माता
पिता अकेला है
देस में?
Subhash Chand: हाँ। माता
पिता अकेला
है।
Kabi: ये
आपका टैक्सी
है?
Subhash Chand: हाँ ये
मेरा ही
टैक्सी है।
Kabi: तो आप
खाली हाथ आया।
एक हाथ में एक
थैली था। फुटपाथ
में रहते थे
और कितना नौ
साल के बाद आप
टैक्सी का
मालिक हो गया?
Subhash Chand: हाँ। अभी
इसपे लोन भी
है। एक लाख।
इस गाड़ी के
ऊपर एक लाख
रूपया बैंक का
लोन है।
Kabi:
महीना का
महीना का
पेमेण्ट
कितना है
इसका?
Subhash Chand: इसका
महीने का पाँच
हजार।
Kabi: आप
कितना कमाते
हो रोज?
Subhash Chand: तीन सौ।
चार सौ रूपया
कमा लेता हूँ।
Kabi: आप
दिन में
चलाते?
Subhash Chand: हाँ। दिन
में ही चलाते
है।
Kabi: और
रात के
ड्रायवर राखे
कि नहीं राखे?
Subhash Chand: नहीं।
नहीं रखे।
Kabi:
क्यों नहीं
रखे?
Subhash Chand: ड्रायवर
को देने से और
नुकसान रहता
है।
Kabi: पर
ड्रायवर को
देते तो दो सौ
रुपये रोज हाथ
में आते?
Subhash Chand: वो बराबर
है लेकिन
ड्रायवर कोई
ऐसा अच्छा मिलता
नहीं है।
Kabi:
अच्छा। कितना
साल टैक्सी
चलाने का बाद
आपने खुद का
टैक्सी ले
लिया?
Subhash Chand: छः साल
चलाने के बाद
लिया।
Kabi: तो एक
लाख के लोन
लिया?
Subhash Chand: हाँ एक
लाख के लोन
लिया।
Kabi:
रूकड़ा देना पड़ता
था उस टाइम पे?
Subhash Chand: हाँ।
चालीस हजार
रोकड़ा देना
पड़ा।
Kabi: तो
अभी आप कहाँ
रहते?
Subhash Chand: ग्राण्ट
रोड ही पे
रहता हूँ।
Kabi:
अकेला कि और
साथ वाला के
साथ?
Subhash Chand: और साथ
वाले हैं अभी।
गाँव के कई
लोग हैं। दस बारह
लोग हैं। उन
लोग का रूम
खुद का है।
उसी के रूम
में मैं रहता
हूँ।
Kabi: तो
बॉम्बे कैसा
लगे?
Subhash Chand: बॉम्बे तो
अच्छा नहीं
है। मुलुक में
जमीन नहीं है
इसलिये
बॉम्बे आना
पड़ता है।
Kabi: आपका
शादी? आपका
माता पिता
लड़की ढूँढ
रिया है?
Subhash Chand: हाँ।
Kabi: तो आप
सादी करेगा तो
आपका बीबी
यहीं लावेगा
कि माता पिता
के पास रहेगा?
Subhash Chand: अभी देखो
वहाँ करूँगा
तो वहीं
रहेगी। अगर यहाँ
करूँगा सादी
तो यहीं
रहेगी। हमारे
उधर यू पी में
ये चलता है।
हाँ कि इधर
अगर लड़की मिल
गई तो सादी कर
लेंगे। माता
पिता को बुला
लेंगे इधर ही।
क्योंकि अपुन को
रहना इधर ही
है।
Kabi: पन
कोई ना कोई
दिन आप वापस
जायेगा रहने
के लिये यू पी
में?
Subhash Chand: हाँ। अगर
इधर धन्धा
होगा तो यू पी
में नहीं जायेंगे।
यू पी में है
नहीं कुछ अपना
अगर नहीं हुआ
अभी जहाँ बाहर
जाने को मैं
सोच रहा था।
Kabi: कहाँ
पर?
Subhash Chand: सउदिया।
Kabi:
ड्रायविंग का?
Subhash Chand: हाँ।
Kabi:
कितना पैसा
लगते है?
Subhash Chand: उधर लगता
है डेढ़ लाख।
Kabi:
किसको देना है
ये डेढ़ लाख?
Subhash Chand: ये पैसा
बीजा आयेगा
ना। यहाँ दलाल
रहते हैं। तो
अभी अपने पास
इतना पैसा
नहीं है। अगर
गाड़ी भी बेच
दूँ तब भी
नहीं पूर होता
है। इसलिये
मैं रुक गया
अभी कमाऊँगा
इसके बाद में
अगर पैसा आ
गया हाथ में
तो सोच रहा
हूँ बाहर जाने
का।
Kabi: ये
अभी ये टैक्सी
बेचो तो कितना
पैसा आयेगा?
Subhash Chand: इसमें
आयेगा डेढ़
लाख। एक लाख
कम पड़ेगा। अगर
मैं बैंक का
लोन नहीं होता
तो बेच के
निकल जाता।
Kabi: तो
आपका कोई जान
पहचान है के
साउदी __ का काम
करने के लिये?
Subhash Chand: जान पहचान
कोई नहीं है।
क्योंकि वहाँ
से बीजा आता
रहता है। हाँ।
अभी हुआ पाँच
छः महीना। साउदी
का एक पसिंजर
मेरे गाड़ी में
जैसे आया। जैसे
आपने बैठा ऐसे
बैठा था। वो
जा रहा था
अँधेरी। तो वो
मेरे से बोला
कि अगर तुमको
जाने का है तो
बोल एड्रेस
अपना लिख के
दे मैं बीजा
भिजवा देता
हूँ। वो बोला
और नम्बर वम्बर
अपना दिया था
वो। कार्ड
दिया था कि
अगर कभी भी
जरूरत लगेगा
तो फोन करना।
मैं बीजा भेज
दूँगा अगर तुम
पासपोर्ट
बनवा लेगा तो।
Kabi: आप
स्कूल कहाँ तक
गये?
Subhash Chand: स्कूल?
मैं पाँचवी तक
गया हूँ।
Kabi: तो आप
कितना साल का
उमर जब आप आया?
Subhash Chand: मेरा उमर?
मेरा उमर है
छत्तीस
उत्तीस साल
का।
Kabi: अभी?
Subhash Chand: अभी।
Kabi: पन जब
आप आया?
Subhash Chand: हाँ। मैं
जब इधर आया तो
मेरा बाइस साल
का उमर था।
तेइस साल का।
Kabi: तो
आपने माता
पिता बोल के
आया कि ऐसे?
Subhash Chand: मैं बोल
के आया।
Kabi: और ये
लोग ने क्या
बोला? कि मत
जाओ?
Subhash Chand: वो बोले
मत जाओ। मैं
बोला इधर
रहूँगा तो
क्या खाऊँगा?
Kabi: आप
कितना बजे तक
गाड़ी चलाते
हैं?
Subhash Chand: आठ बजे
तक।
Kabi: फिर
रूम जायके कौन
रोटी बनाते?
Subhash Chand: रोटी रूम
पे नहीं पकाता
हूँ। होटल में
खा लेता हूँ।
Kabi:
अच्छा?
Subhash Chand: हाँ।
Kabi: ये भी
पैसा लग गया?
Subhash Chand: जब कोई है
नहीं रोटी
पकाने वाला।
अक्खा दिन गाड़ी
चलाओ। इसके
बाद में जाओ
और खाना पकाओ
दो घण्टा उसमें
जायेगा। इससे
अच्छा होटल
में खाना खा
के सो जाने
का।
Kabi: तो
कौन सा होटल
में खाता आप?
Subhash Chand: हमारे उधर
है बॉम्बे
रेस्टोरेन्स।
उसी में खाते
हैं हम लोग।
Kabi: आपके
क्या पसंद है?
Subhash Chand: कभी बकरा भी
खा लिया। कभी
मुर्गी भी खा
लिया। कभी
सब्जी भी खा
लिया। कभी दाल
भी खा लिया।
Kabi: तो
रोटी मिलती कि
नान मिलती कि
चावल खाते?
Subhash Chand: नान रोटी
खाता हूँ।
चावल भी।
दोनों खाता
हूँ। एक खाने
से हम लोग का
पेट नहीं भरता
है। पहला रोटी
खाऊँगा उसके
बाद में चावल
खाऊँगा।
Kabi: तो
दिन में ही
नाश्ता करते?
Subhash Chand: हाँ।
Kabi: क्या
नाश्ता करते?
Subhash Chand: हम बाहर
निकल गये। जो
कुछ मिला वहीं
नाश्ता किये
ना। सुबह में
पराठा और हलुआ
का नास्ता किये।
Kabi: ये
हलुआ अच्छा
हलुआ कहाँ
मिलते?
Subhash Chand: वो उसी
होटल पे मिलता
है। और वहाँ
पाव सेर दूध
मिलेगा। ये नास्ते
में। उसके बाद
में गाड़ी
निकाल लिया।
दिन में कहीं
गये किधर होटल
पे तो चाय
पानी पी लिये
वहाँ।
बिस्किट
विस्किट
लिये। पानी
पिये चाय पिये
फिर अपना गाड़ी
चला रहा हूँ।
Kabi: तो
जैसे आपने
समोसा कचौड़ी
ये नहीं खाते?
Subhash Chand: खाता हूँ
लेकिन हमको
उतना पसंद
नहीं है। कभी कभार
खा लिया तो खा
लिया।
Kabi: वड़ा
पाव तो पसंद
है कि नहीं?
Subhash Chand: वो नहीं
पसंद है।
Kabi: ये
बिलकुल नहीं
पसंद?
Subhash Chand: ये बिलकुल
नहीं पसंद है
वड़ा पाव। वड़ा
पाव मैंने
खाया नहीं।
आया था तभी
खाया था। उसके
बाद में मेरे
को कम से कम
ग्यारह बरस हो
गया। मैं वड़ा
पाव नहीं
खाया।
Kabi:
जिसको रूम आप
दे दिया है वो
भी टैक्सी
चलाते हैं?
Subhash Chand: नहीं। वो
अपना कपड़े का
सिलाई का
कारखाना है उसके
पास।
Kabi: तो
वहाँ नौकरी
नहीं मिलते?
Subhash Chand: दो हजार
तीन हजार
देगा। तो
उसमें क्या
होयेगा?
Kabi: कुछ
नहीं होगा। तो
जब आप आया
आपका कोई सपना
था कि मेरा
जिन्दगी ऐसा
होगा बॉम्बे
में?
Subhash Chand: कुछ ऐसा
नहीं था। मैं
वहाँ से सोच
के आया था कि कोई
धन्धा
करूँगा।
Kabi: कैसा
धन्धा?
Subhash Chand: हाँ। नहीं
किसी चीज का।
कारखाने का
धन्धा करूँगा
तो मेरे पास
पैसा था। मेरे
पास गाँव पे
पहले जब मैं
आया तो मेरे
पास जमीन था।
उस जगह को जब
मैंने बेचा तो
यहाँ आया तो
बॉम्बे में
मैं नया था।
हमको कुछ मालूम
नहीं था। यहाँ
के लोग सब लोग
मिल कर के वो पैसा
मेरा खा लिये।
मेरे पास नहीं
रह गया। __ सेठ
के पास नौकरी
किया।
Kabi:
किसने खाया
आपका पैसा?
Subhash Chand: वो साहब
यहीं के लोग
थे। अब वो सब
मर मरा गये। हैं
भी नहीं। वे
बोल रहे थे कि
पैसे दो। ये
कारखाना डला
देता हूँ। ऐसा
है। वैसा है।
दे दिया मेरी
सीधी सुभाव
थी। मैंने दे
दिया उसको। वो
ले के यहाँ से
भग गया। और
उसका गाँव। वो
बोला मैं यू
पी का रहने
वाला हूँ।
आपके उधर ही
का रहने वाला
हूँ। मेरे साथ
में वो साल -
पन्द्रह
महीना - सोलह
था। इसके बाद
में भरोसा हो
गया। मैं मेरा
पैसा ले के वो
यहाँ से निकल
गया।
Kabi: और तो
आपने ढूँढी
उसको?
Subhash Chand: उसको बहुत
ढूँढा। वो
मिला नहीं। आज
तक नहीं मिला।
Kabi: मिल
जायेगा तो आप
क्या करेगा?
Subhash Chand: क्या
करूँगा?
Kabi:
कितना जमीन
बेच दिया?
Subhash Chand: वो था
चालीस हजार
का।
Kabi: हाँ।
पर जमीन कितना
था?
Subhash Chand: जमीन था
चार बिसवा।
Kabi: सब
तरह का लोग है
बॉम्बे में?
Subhash Chand: हर तरह के
लोग हैं।
Kabi:
अच्छा तो आपका
क्या ख्वाहिश
है? ख्वाहिश
है आपका?
Subhash Chand: क्या
ख्वाहिश है?
यही ख्वाहिश
था कि अगर
पैसा हो
जायेगा तो मैं
बाहर चला
जाऊँगा।
Kabi: पेपर
में आता है कि
कभी कभी ये
लोग
धोखाबाजी।
Subhash Chand: हाँ। ऐसा
भी हो जाता
है। अगर अपना
नसीब गड़बड़ है
तो धोखा हो
जाता है। पैसा
भी चला जाता
है और काम भी
नहीं हो पाता।
आदमी जा भी
नहीं पाता है।
और पैसा भी
चला जाता है।
ख्वाहिस तो
बहुत कुछ थी
लेकिन अपने
पास कुछ है ही
नहीं तो क्या
करूँ? किससे
माँगूँ?
Kabi: क्या
था ख्वाहिस?
Subhash Chand: नहीं अभी
ये ख्वाहिस था
कि अगर पैसा
हो जाये तो
मेरे दो बहिन
की अभी सादी
नहीं हुई है।
सादी ही कर
देता तो अपना
सादी भी कर
लेता। वो सब
बहुत तकलीफ
है। मेरी माँ
बहुत बुढ्ढी
है। ये खाना
भी नहीं पका
पाती है। तो
अभी बहन की
सादी कर देंगे
उसके बाद में
वो अपने
ससुराल चली
जायेगी। फिर
रोटी कौन
पकायेगा?
Kabi: हाँ
ये भी बात है।
Subhash Chand: इसलिये।
लेकिन है नहीं
तो अपनी क्या
करें। मजबूरी
है।
Kabi: बहिन
की ये दोनों
बहिन की उमर
कितनी है?
Subhash Chand: ये मेरे
से बड़ी है। एक
और एक मेरे से छोटी
है। और उसके
माता पिता
दोनों मर चुके
हैं। वो मेरे
पिता जी के
भाई की छोकरी
है।
Kabi: हाँ।
काका की लड़की।
Subhash Chand: हाँ। तो
अभी सब करना
पड़ेगा हमको।
Kabi: तो
कौन ढूँढ
रिया? इसके
लिये लड़का कौन
ढूँढ रिया?
Subhash Chand: वो वहाँ
अभी पैसा हो
जाये तो हमारे
वहाँ लड़का
ढूँढना नहीं
पड़ता है। मिल
जाते हैं। ये
दोनो सादी
करने में कुछ
नहीं जायेगा
तो यू पी में
करेंगे तो दो
लाख रूपये
होना चहिये।
Kabi: दहेज?
Subhash Chand: दहेज। यू
पी में बिगैर
दहेज का सादी
नहीं होती।
यहाँ भी तो
दहेज। लेकिन
यू पी में कम
पड़ता है। और
यहाँ तो बहुत
सादी में दहेज
पड़ता है। यू
पी में तो खाली
मोटर सायकल
देना पड़ता है।
यहाँ तो मारुतिü
सूमू ऐसा सब
गाड़ी पाँच
पाँचü दस दसü
बीस बीस लाख
की गाड़ी चलती
है। यू पी में
ऐसा नहीं चलता
है। खाली मोटर
सायकल चलती
है। फिर मोटर
सायकल खरीदने
जाओगे तो पचास
हजार लगेगा।
उसके बाद में
खाने पीने का
पचास हजार हो
जायेगा। एक
लाख रुपया
सादी में
लगेगा। जबकि
अच्छा सादी
नहीं करेंगे
तो। अच्छा
करेंगे तो
ज्यास्ती
पैसा होना
माँगता है। ये
अपने पास है
नहीं कि कैसा
भी कर के।
अपने पास कोई
ऐसा जगह जमीन
भी नहीं है कि
उसको निकाल के
सादी कर दूँ।
Kabi: तो जब
अगर आप सादी
करेगे। आप
दहेज माँगेगा?
Subhash Chand: कुछ नहीं।
Kabi: दहेज
नहीं माँगेगा?
Subhash Chand: नहीं।
Kabi: तो
ऐसा लड़का नहीं
मिलेगा यू पी
में आपकी बहन
के लिये के वो
दहेज नहीं
माँगेगा?
Subhash Chand: नहीं ऐसा
मिलता नहीं
है। वैसे कहीं
मिल गये तो
मिल गये। नहीं
तो नहीं है।
जिसके पास जमीन
रहता है वो
बिगैर दहेज का
सादी नहीं
करता है हमारे
यू पी में। और
हमारे पास
जमीन है नहीं।
तो हमको दहेज
मिलेगा नहीं।
ना हमको
चहिये।
Kabi: मैं
बंद करूँ कि
आपको और कुछ?
Subhash Chand: और क्या
बोलूँ?
Kabi: वो जो
है जो मैं?
Subhash Chand: अब यही
दिल में था।
Kabi: हाँ।
ये दिल में
था।
Subhash Chand: वो अपने
पास दिल का
तमन्ना पूरा
कहाँ होयेगा।
पैसा अपना पास
है ही नहीं।
ये सपने देखते
रहो। कभी ऊपर
वाला सुनेगा
तभी होयेगा।
Kabi: आप
प्रार्थना
करते हो ऊपर
वालों का?
Subhash Chand: रोज़ सुबह
साम करता हूँ
लेकिन सुनता
किधर है?
Kabi: क्या
मालूम सुनता
है पन उसका
जवाब नहीं
आया।
Subhash Chand: बराबर है।
सुबह मैं
लेटरीन से
आया। फिर नहाया
धोया। नास्ता
बाद में करता
हूँ। पहले
प्रार्थना
करता हूँ।
उसके बाद में
नास्ता
पास्ता करके
तभी गाड़ी पे
आता हूँ। साम
को जाऊँगा
अभी। दोनो
टाइम नहाता
हूँ। इसमें
बहुत गर्मी
लगती है। वही
साम को जब कभी
जाऊँगा दस
बजेü ग्यारह
बजेü बारह बजे
तब जाऊँगा
नहाऊँगा।
उसके बाद में
प्रार्थना
करूँगा। उसके
बाद में
जाऊँगा खाना
खाने। फिर भी
किधर है वोü
सुनता ही नहीं
है। क्या मालूम
सुनता हैü
जवाब ही नहीं
देता है। वो
तो उसका महिमा
है। क्या
मालूम क्या
करता है।
Kabi: पन
बिस्वास है
आप?
Subhash Chand: बिस्वास
है कि कभी
प्रार्थना
करते रहो।
देगा तो देगा।
नहीं देगा तो
क्या। पैदा
किया है तो किधर
ना किधर से
देगा। वो
जितने में
रखेगा उतने ही
में रहना
पड़ेगा।
Kabi: I hope you enjoyed this episode. I got into Subhash Chand's taxi because on his back windscreen, in bold blue letters was written 'Time is Money'. You can see photos of that and of course, of him also of Null Bazaar and other views on the blog at MeterDown.WordPress.com where there are also outtakes from this podcast but the big addition to the blog is that now, it is also in Hindi. So go to MeterDown.WordPress.com and click on the tab in devnagari script that says 'हिन्दी
ब्लॉग'।
Hindi translation of the blog and the Hindi transcription of the podcast are by the wonderful efforts of V. S. Rawat of Indore to whom I am eternally grateful. I hope you join me again for the next episode when we write the city in conversation with another Bombay taxi driver. Till next time.